Geeta Updesh in Hindi गीता उपदेश हिंदी

3067 BC is when the Mahabharata war took place, and it is during this time when Bhagwan Krishn blessed Arjun with Geeta Updesh. The knowledge was given so that Humans can know about the essence of their existence and how they should lead their lives.

गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अनासक्त कर्म यानी ‘फल की इच्छा किए बिना कर्म’ करने की प्रेरणा दी।

गीता उपदेश Geeta Updesh (Hindi)

Geeta Mahabharat

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इसका प्रमाण उन्होंने अपने निजी जीवन में भी प्रस्तुत किया। मथुरा विजय के बाद भी उन्होंने वहां शासन नहीं किया।

Geeta-Updesh

कला से प्रेम करो : संगीत व कलाओं का हमारे जीवन में विशिष्ट स्थान है। भगवान ने मोरपंख व बांसुरी धारण करके कला, संस्कृति व पर्यावरण के प्रति अपने लगाव को दर्शाया।

इनके जरिए उन्होंने संदेश दिया कि जीवन को सुंदर बनाने में संगीत व कला का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

निर्बल का साथ दो : कमजोर व निर्बल का सहारा बनो। निर्धन बाल सखा सुदामा हो या षड्यंत्र का शिकार पांडव, श्रीकृष्ण ने सदा निर्बलों का साथ दिया और उन्हें मुसीबत से उबारा।

अन्याय का प्रतिकार करो : अन्याय का सदा विरोध होना चाहिए। श्रीकृष्ण की शांतिप्रियता कायर की नहीं बल्कि एक वीर की थी। उन्होंने अन्याय कभी स्वीकार नहीं किया। शांतिप्रिय होने के बावजूद शत्रु अगर गलत है तो उसके शमन में पीछे नहीं हटें।

मातृशक्ति के प्रति आदर भाव रखें : महिलाओं के प्रति सम्मान व उन्हें साथ लेकर चलने का भाव हो। भगवान कृष्ण की रासलीला दरअसल मातृशक्ति को अन्याय के प्रति जागृत करने का प्रयास था और इसमें राधा उनकी संदेशवाहक बनीं।

अपने अहंकार को छोड़ो : व्यक्तिगत जीवन में हमेशा सहज व सरल बने रहो।

जिस तरह शक्ति संपन्न होने पर भी श्रीकृष्ण को न तो युधिष्ठिर का दूत बनने में संकोच हुआ और न ही अर्जुन का सारथी बनने में। एक बार तो दुर्योधन के छप्पन व्यंजन को छोड़ कर विदुरानी (विदुर की पत्नी) के घर उन्होंने सादा भोजन करना पसंद किया।

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जीवन में उदारता रखें : उदारता व्यक्तित्व को संपूर्ण बनाती है।

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श्रीकृष्ण ने जहां तक हो सका मित्रता, सहयोग सामंजस्य आदि के बल पर ही परिस्थितियों को सुधारने का प्रयास किया, लेकिन जहां जरूरत पड़ी वहां सुदर्शन चक्र उठाने में भी उन्होंने संकोच नहीं किया। वहीं अपने निर्धन सखा सुदामा का अंत तक साथ निभाया और उनके चरण तक पखारें।

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गीता मूल शिक्षा

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य

गीता को हिन्दु धर्म मे बहुत खास स्थान दिया गया है। गीता अपने अंदर भगवान कृष्ण के उपदेशो को समेटे हुए है। गीता को आम संस्कृत भाषा मे लिखा गया है, संस्कृत की आम जानकारी रखना वाला भी गीता को आसानी से पढ़ सकता है। गीता मे चार योगों के बारे विस्तार से बताया हुआ है, कर्म योग, भक्ति योग, राजा योग और जन योग।

गीता को वेदों और उपनिषदों का सार माना जाता, जो लोग वेदों को पूरा नही पढ़ सकते, सिर्फ गीता के पढ़ने से भी आप को ज्ञान प्राप्ति हो सकती है। गीता न सिर्फ जीवन का सही अर्थ समझाती है बल्कि परमात्मा के अनंत रुप से हमे रुबरु कराती है। इस संसारिक दुनिया मे दुख, क्रोध, अंहकार ईर्ष्या आदि से पिड़ित आत्माओं को, गीता सत्य और आध्यात्म का मार्ग दिखाकर मोक्ष की प्राप्ति करवाती है।

गीता मे लिखे उपदेश किसी एक मनुष्य विशेष या किसी खास धर्म के लिए नही है, इसके उपदेश तो पूरे जग के लिए है। जिसमे आध्यात्म और ईश्वर के बीच जो गहरा संबंध है उसके बारे मे विस्तार से लिखा गया है। गीता मे धीरज, संतोष, शांति, मोक्ष और सिद्धि को प्राप्त करने के बारे मे उपदेश दिया गया है।

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आज से हज़ारो साल पहले महाभारत के युद्ध मे जब अर्जुन अपने ही भाईयों के विरुद्ध लड़ने के विचार से कांपने लगते हैं, तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि यह संसार एक बहुत बड़ी युद्ध भूमि है, असली कुरुक्षेत्र तो तुम्हारे अंदर है। अज्ञानता या अविद्या धृतराष्ट्र है, और हर एक आत्मा अर्जुन है। और तुम्हारे अन्तरात्मा मे श्री कृष्ण का निवास है, जो इस रथ रुपी शरीर के सारथी है। ईंद्रियाँ इस रथ के घोड़ें हैं। अंहकार, लोभ, द्वेष ही मनुष्य के शत्रु हैं।

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गीता हमे जीवन के शत्रुओ से लड़ना सीखाती है, और ईश्वर से एक गहरा नाता जोड़ने मे भी मदद करती है। गीता त्याग, प्रेम और कर्तव्य का संदेश देती है। गीता मे कर्म को बहुत महत्व दिया गया है। मोक्ष उसी मनुष्य को प्राप्त होता है जो अपने सारे सांसारिक कामों को करता हुआ ईश्वर की आराधना करता है। अहंकार, ईर्ष्या, लोभ आदि को त्याग कर मानवता को अपनाना ही गीता के उपदेशो का पालन करना है।

गीता सिर्फ एक पुस्तक नही है, यह तो जीवन मृत्यु के दुर्लभ सत्य को अपने मे समेटे हुए है। कृष्ण ने एक सच्चे मित्र और गुरु की तरह अर्जुन का न सिर्फ मार्गदर्शन किया बल्कि गीता का महान उपदेश भी दिया। उन्होने अर्जुन को बताया कि इस संसार मे हर मनुष्य के जन्म का कोई न कोई उद्देशय होता है। मृत्यु पर शोक करना व्यर्थ है, यह तो एक अटल सत्य है जिसे टाला नही जा सकता। जो जन्म लेगा उसकी मृत्यु भी निश्चित है। जिस प्रकार हम पुराने वस्त्रो को त्याग कर नए वस्त्रो को धारण करते है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर के नष्ट होने पर नए शरीर को धारण करती है। जिस मनुष्य ने गीता के सार को अपने जीवन मे अपना लिया उसे ईश्वर की कृपा पाने के लिए इधर उधर नही भटकना पड़ेगा।

श्री कृष्ण का मानव जीवन जीने का उपदेश

श्रीमद भगवद एकादश स्कंध अध्याय ७ श्लोक ६-१२

तुम अपने आत्मीय स्वजन और बन्धु-बांधवों का स्नेह सम्बन्ध छोड़ दो और अनन्य प्रेम से मुझमें अपना मन लगाकर सम दृष्टी से पृथ्वी पर स्वच्छंद विचरण करो|

इस जगत में जो कुछ मन से सोचा जाता है, वाणी से कहा जाता है, नेत्रों से देखा जाता है, और श्रवण आदि इन्द्रियों से अनुभव किया जाता है, वह सब नाशवान है, स्वप्न की तरह मन का विलास है| इसीलिए माया-मात्र है, मिथ्या है-ऐसा जान लो |

जिस पुरुष का मन अशांत है, असयंत है उसी को पागलों की तरह अनेकों वस्तुयें मालूम पड़ती हैं ; वास्तव में यह चित्त का भ्रम ही है | नानात्व का भ्रम हो जाने पर ही “यह गुण है” और “यह दोष है” इस प्रकार की कल्पना करी जाती है | जिसकी बुद्धि में गुण और दोष का भेद बैठ गया हो, दृणमूल हो गया है, उसी के लिए कर्म, अकर्म और विकर्म रूप का प्रतिपादन हुआ है |

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जो पुरुष गुण और दोष बुद्धि से अतीत हो जाता है, वह बालक के समान निषिद्ध कर्मों से निवृत्त होता है ; परन्तु दोष बुद्धि से नहीं | वह विहित कर्मों का अनुष्ठान भी करता है, परन्तु गुण बुद्धि से नहीं |

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जिसने श्रुतियों के तात्पर्य का यथार्थ ज्ञान ही प्राप्त नहीं कर लिया, बल्कि उनका साक्षात्कार भी कर लिया है और इस प्रकार जो अटल निश्चय से संपन्न हो गया है, वह समस्त प्राणियों का हितैषी सुहृद होता है और उसकी साड़ी वृत्तियाँ सर्वथा शांत रहती हैं| वह समस्त प्रतीयमान विश्व को मेरा ही स्वरुप – आत्मस्वरूप देखता है; इसलिए उसे फिर कभी जन्म-मृत्यु के चक्र में नहीं पड़ना पड़ता |

|| जय श्री कृष्ण ||

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Comments

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  1. Bhagwat kathanak says:

    Jay shri Krishna

  2. Vinay द्वि says:

    कृष्ण ने कहा था धर्म का साथ दो ना कि निर्बल का

  3. Khushi pandey says:

    Geeta me likha hai hamara sharir panch tatvon se bana hua h (mitti, jal,vaayu,aakash,aur agni)…aur hamare andar ek energy h jo ki aatma h aur aatma parmatma ka hi ansh h mtlb humsab ko ye samjhna chahiye ki sharir bs ek shadhan hai iss duniya me rhne ka aatma kv ni marta marta humara shahri h kyuki atma to parmatma h n to kya humsab parmatma h aur agar h to fr itne paap kyu hote h koi kisi ko samjhta kyu ni ki yesab moh maya h insab ka tyag kr dena chahiye aur bhagwan ki bhakti krni chahiye whi krna chahiye jisse apne aatma ko mtlb hamare parmatma ko koi v dukh na ho kyuki jo dukh hume hota h usse kahi adhik dukh huamare parmatma ko hota hoga …jaise humsab kuchh v banate h aur koi usse khrab kr Deta h ya kuchh shamy paschat wo khud kharab ho jata h to hume kitna dukh hota h waise hi to hamare bhagwan ji ko aur humare mummy Papa ko jinhone hume janm diya h unhe kitne dukh hote honge …..hai n mai ye bs isliye bol rhi hu kyuki mai geeta padhti hu ramayan padhti hu air aisa kuchh v jaanbujkr ni krti jisse bhagwan ji aur mummy Papa ko dukh ho aur mujhe v …lekin mai yesab isiliye v krti hu kyuki mai bhagwan ji milna chahti hu muhhe dekhna chahti hu …isiliye mai kisiko v dost ni banati kisiki kv sikyat ni krti chugli ni krti kyuki mere bolne se na to koi thik ho jaayega na koi bura ban jaayega. ..mujhe iss duniya se mtlb hi ni h jabse mere man me bhagwan ji ko dekhne ki lalsha jagi h lekin wo ni aate sapne me v bulati hu pr wo ni aate kaise aayenge wo mujhe unhe dekhna h kyuki mai kisika bura ni krti pr mere dushman kam ni h …haa mujhse v kuchh galtiya hui h pr maine jaanbujkr ni kiya aur unsab galtiyo k liye mai mummy Papa se maar kha chuki hu aur usse v bada maine bahut dukh diye h apne aap ko v …taki mai kv dubara kuchh galti na kru pr bhagwan ji ni aate mai Mar v skti hu marne se darr ni h kyuki mujhe kisise mtlb ni h ….pr Mummy Papa ko dukh ni de skti bahut maante h mujhe wolog aur mai.v maanti hu lekin mujhe bhagwan ko v dekhna h pr kaise mai sab krti hu jisse unhe ko dukh na ho pr wo ni aate kaise aayenge ya fr mai.kya kru jisse unhe lage ki mai unse jayada kisise payar ni krti unke shiva koi ni h meri life me important. …

    1. Shubhansh says:

      Bhagwan to hr kann me h hr mann mandir me h, hr manushya me bhagwan h aapme v h, jis tarah hm agni ki par hayi nhi dekh skte, usi prakar hm apne bhagwan ko mehsus to kr skte h pr dekh nhi skte, jis din aapne bhagwan ko dekhne ki iksha chhor di us din aap bhagwan ko pa loge, tb tk apne aapko khush rakhiye, apne mata pita ko khush rakhiye aur khud v khush rahiye, galti krna aur na krne matra se bhagwan ki prapti nhi hoti uske liye, prem, tyag, Dheeraj, rakhna ati aavashyak h…..

    2. Bhaut pysra kikha bilkul sach kikja

    3. Bhagwaan ko paana hai to mann se tann se buddhi se bilkul pavitra hoke aatma se parmatma hoke jis din pukaar karoge us din bhagwaan ka ehsaas hoga or jis din tumhare andar se ‘MAIN’ ,’EHNKAAR’ ye sab bilkul khatm ho jayega tab usi waqt teri satgati hogi us din oukaar na mne b jeevan me sab chhod diya par abhi mujhe lagta hai ki maine kuch chhoda hi ni hai… bhagwaan to bhaaav k bhukhe h oyar prem ke wo kisi ke bandhan me ni band sakte na koi unhe baandh sakta keval ek matra bandhan hai wo h orem ka or jaha prem nahi waha bhagti nahi jaha bhagti nahi waha sabr nahi jaha sabr nahi wha bhagwaan nhi

    4. Mere se contact kro… Khusi pandey

    5. rahul rawat says:

      hi my name is rahul mene aapke qustion pada aapke vichar bhuat sunder h but aap kuch aise baat bol rahe ho jo thoda preshaan karne wale h jaise aap ne apne barre me acche kuch alag trah ki baate kari but aap ko me ek exmple de sakta hun jaise shyad aapki kuch help ho sake jaise bhagwan ko pane ya dekhne ki ichha ki aap baat kar rahe h to is duniya me jine ke liye hame (o2 yani hawa ) ki jarurat h par aap kaho ki mujhe hawa dekhni h to aap sirf use maheshus karte ho thik ussi prakar bhagwan vi hamre saath h aapko ye to aapko pata h ki bhagwan har jagha h wo h hame samjhna hoga bhagwat geeta ke suru ke panno me ye baat kahi gyi me me har jagha h meri ek or baat h marne ki baat kabhi vi apne dimak me mat lekar aao ke bhut galat baat h mata pita ji ki sewa karo wahi hamare bhagwan h pujniya h galat baate dimaak me mat laho or bhagwat geeta ko or acche man se padho me ye dawa nahi karta ki mene bhagwan ko dekha h but istna jarur h ki hamre upar koi sakti jarur h jo hamre saath hoti hame chala rahi h hila rahi mera yahi maanna h ki aap fir ek or achhe dhang se bhagwat geeta padho shant chit hokar or bhagwat geeta me bewajh marne ki baat to khai nahi likhi to mujhe nahi lagta ki jo apne baare me soch rahe ho wo sahi h but ha agr aapko kisis se kuch janna h to aap apne mummy papa ko samarpand kar do or aapke man me jo kuch vi chal raha h aacha bura ya kuch vi use khul kar apne mammy papa ke saath sher karo or unse baat kro sirf wahi jp hamesha aapko sahi or ek dam sahi or satik baat batayenge aap meri kisi vi baat ko mat mano par jo me khe raha hun to ek baat try jarur kro, best wishish for your futcher ,or anta me meri koi baat buri lage to sorry or achi lage to thanks reply jauru kar dena rahul rawat

  4. Rajat Sharma says:

    Jai Shri Krishana

  5. Gita ka name Gita hi kiun rakha gaya. Koi batayega ishka uttar

  6. kash bhagwan acche logo ki khabar jaldi le liye karte acche aur garib logo ko choti choti khushiyon ke liye bahut intezar karna padta hai

    1. Abhimanyu from Mahabharata says:

      Achhe aur sache log hamesha khush rahte dukh ko bewkuf banao ki hum khush hai aap kabhi dukhi nahi honge…..

    2. ram sagar sahu says:

      bhagwan achhe logo ko jaldi nahi sunti magar der se hi jarur sunte hai

    3. rahul rawat says:

      hi aap ki baat sahi samaj me kahi log h jo aaj ke samay ameer h or garib or garib ho raha h ye wakayi kuch to h jo mujhe vi samjh nahi aata but ha me yaha ameero ki burai bilkul nahi kar rah but aisa ho raha h pata nahi q…………………rahul rawat

  7. Sumit Thakur says:

    Bhaiyon kya nasha karna paap he esaa khi likha he geeta me or paap he too kyu he.

    1. Sameer Sinha says:

      Bhog vilasita (Addiction ) me reh kar iss importent jivan ko nahi samajhna paap hi wo kaise ki agar aap sex ya fir alcohol ke addicted hai to aap pine ke baad aap nhi rehte hai aur aapka mind normally behave nhi karta aur aap bura kaam kar baithte hain jaise fighting , abusing , rape or murder etc.
      which means addiction har haal me bura hi aur iss bahumulye jiwan ko barbad karna paap hi to hai bhai.
      Jai Shree Krishna

    2. Sumit thakur bilkul nasha karna paap hai or wo uslye nasha mass khana ye sab asuri kaam h saitaani kaam hai islye ye bht bda paap hai

    3. Vinay द्वि says:

      कृष्ण ने कहा था धर्म का साथ दो ना कि निर्बल का

  8. Please tell time duration of Geeta

    1. rahul rawat says:

      hi…. aap se yahi kahunga ki aap time mat dekhe bus aapne tarike se padna suru kare but importent geeta ko man se padhe , dil se padhe nahi sab upar se nikal jayega , i hope ki aap ki help ho sake thanks rahul rawat

  9. Geeta path early morning and evening necesary in read my life

  10. RAJIV sharma says:

    Jai shri Krishna
    Ji

    1. Jai Shree Krishna Rajiv Ji

  11. Laxman Mallik says:

    Jai shree krishn….radhe radhhe syaam

  12. Anil kumar says:

    Ham Hindu he
    Har Hindu ko gita pdhna jaruri he
    Jai radhe krisna

  13. Anil kumar says:

    Jai shree kirshn
    Radhe Radhe

  14. Akhil sharma says:

    Shrihari subhapraphat

  15. Praveen menariya says:

    Jai shri Krishna
    Jai radhe krishna

  16. shiv ravi says:

    Us par brmha ne is brmhand ki rachna ki h aor hum hn uske brmhans…unki lilao k 100% smjh pana hmari man aor buddhi ki yogyta nai h….ise vo hi smjh skte hn Jo apne andr sthit param anand kunj k smprk m hn…

  17. Krisan ki 16000 Hazar patni thi kya krisan ne Apne 45 sal Sahi karte karte hi jujar diye krisan ne kya11200 fere liye the or vo itni ptniyo ko kya kiya itni patni yo ko khus kr paya hoga aagar vo bghvan tha to vo mra q

    in que. Ke ans h kya kisi ke paas to cell kre 8607208982

    1. Radhe Radhe Ajay ji,

      Soft Reply: Pehle aap Srimad Bhagwat Puran acche se kum se kum 3 baar pura padhe. Aapko sabhi baaton ka uttar mil jayega.

      Hard Reply: Ajay ji agar ghar may do chaar jodi joote chappal ho toh khud ke face pe 10 baar jor se maariye aur Bhagwan se kshama mangiye. Kyuki jaisi aapki soch hai jald hi kisi din acche se pit jaaoge kisi haribhakt kattar Hindu dwara.

      Jai Shree Krishn

    2. Abhishek patidar says:

      Tu kr skta he ky 16000 hazar pathi
      Beta bhagwan bhagwan he …
      Kai ko dimag kharaha he

    3. vivek sharma says:

      shir krishan to radha ko pyar kertay the pr jo 16000 gopiya the vo to krishan ko apna pati man chuki the is leya shri krishan ne sabhi gopiyo ko patni k darja dya tha kyo ke vo kise k dil nhi dhukena chata thay shri krishan 45 sal nhi 125 sal tak is preathye lok pr rehay tha.

    4. Bhai vse baat thik h teri
      Bhai m santust hu
      M aap kise n bhi koni maanu

    5. Abhimanyu from Mahabharata says:

      Ajay Ji aap shrimad bhagwad Greta padhe ya fir koi job dhundh le kisi ki ashtha ka majak na banaye agar meri baat galat lage toh mujhe chhota Bhai samajh kar kshama Kate.
      Jai shri Krishna

  18. Sanjay prajapati says:

    Bina bhakti bhav k 84lac yonio me Jana hi hai isliye bhakti yoga apnao taki agla janm for manusy ka ho

  19. jai shri krishna main aaj se iska palan karunga kuch bhi ho main ab krodh or irshya etc nahi karunga

  20. AMAN SHUKLA says:

    Isse bhatke hue logo ko rasta milta h. Jo bhi iss path pe chale usse jine ka sahara mil jayega.
    Main ek hi chiz kahunga achha karam kro parmatma uska fal awasya dega.

  21. Roshan Barnwal says:

    Isse bhatke hue logo ko rasta milta h. Jo bhi iss path pe chale usse jine ka sahara mil jayega.
    Main ek hi chiz kahunga achha karam kro parmatma uska fal awasya dega.

  22. Bus itna hi khena chaunga nice kuch aacha feel Hua

    1. Yes Geeta hmare jivan ka mhan yog he geeya ka gyan kabhi west nhi jata.

    2. Gita depicts us the reality of life. The follower of gita are the real follower of god.

  23. bhagwan modi says:

    REally great Geeta
    For art of living

  24. RAJESHJANI says:

    GEETA IS A NOT ONLY REALIGION BOOK BUT GEETA IS WHOL MEANING OF HUMAN LIFE & HUMAN LIFE SYSTEM

  25. abhishek pandey says:

    jay sri krishna……….

  26. sahi m yeh toh kalyug hi hai yaha koi satya ki jai nni bolta hai adhram ki jai bolte hain kya kar sakte hain batao aise kalyug m phir ..

  27. Hare krishna…geeta ka sar samjh aajaye to manav is bav sagar se paat utar jaye

  28. right geeta is all in one…….give all knowledge

  29. Maneesh Kumar Jilendra says:

    Jai shree Krishna…..

  30. Tashbir Singh says:

    Geeta mein likhi gai baton ka hamein anusran karna chahiye.

  31. santosh kumar saha says:

    Hare krishna
    Radhe Radhe

  32. Rohit Thakur says:

    jai shri ram
    gau seva karo aur dukhiyo ki seva karo bus aur bhagwan ka name sukh dukh dono samay jo. jai shri radhekrishna

  33. TITAN KUMAR DAS says:

    kebal gyan lene se nahi hotahe usi gita gyan ko apna nitidin ka jiban mein ya apna karmkhetra mein palna jaruri he. Tab jake ehi gita gyan phaldai hota he. JAY SHRI KRISHNA.

  34. gaurav.punj says:

    Geeta, Ramayan and Mahabharta are Dharmik granth books..vo holy books school ke bacho ko padhana chahiye.. vedic knowledge badhti ha tez dimag or vo books pure world ke schools mai padhana chahiye… Guru ke samne…or bache ache celibacy ke palan kar sake.. school mai geeta, ramayan and mahabhara books padhe jaaaye toh…acha hota ha…
    Modi ji visit at Ireland and white Irish peoples speak sanskrit verse and sang sanskrit theme song front of modi ji at Dublin WOW

    1. Radhe Radhe Nitin ji,

      Kyuki Yeh Kaliyug hai aur dharma sirf ek pair pe khada hai. Yeha bhola bane rehne se murkh banaya jaate hai isiliye samajhdar aur sajag rahne ki jarurat hai. Aanewale samay mey aur pratikul paristhithi hogi. Isliye dharm ke raaste pe chalte hue Shree Krishn ke sharan mey jana chahiye aur prayasrat usi ke liye rehna chahiye.

      Jai Shree Krishn

  35. Rajesh sikarwar Dholpur
    Shrimadbhagbat geeta ka gyan jaruri

    1. Jai Shri Krishna jai gopala

      1. Kanhiya lal Bhagat ji says:

        Jai shri krishna
        Ye to logo ki soch h ki Bhagwan itni patniyo ko kese khus rakte the
        Are bo bhgwan h sb ke paas ek time me jaa sakte h unke to shstro rup h bo har manv ke sarir me attma ki tarha rehte h pir 16ooo to kya …??

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