Mukh Dekhan Ho Aayi Lal Ko

मुख देखन हों आई लाल को - Mukh Dekhan Ho Aayi Lal Ko

मुख देखन हों आई लाल को
Mukh Dekhan Ho Aayi Lal Ko

मुख देखन हों आई लाल को।

मुख देखन हों आई लाल को। काल मुख देख गई दधि बेचन जात ही गयो बिकाई ॥१॥

दिन ते दूनों लाभ भयो घर काजर बछिया जाई। आई हों धाय थंभाय साथ की मोहन देहो जगाई ॥२॥

सुन प्रिय वचन विहस उठि बैठे नागर निकट बुलाई।परमानंद सयानी ग्वालिनी सेन संकेत बताई ॥३॥

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