Geeta Updesh in Hindi – गीता उपदेश

Geeta-Mahabharat

3067 BC is when the Mahabharata war took place, and it is during this time when Bhagwan Krishn blessed Arjun with Geeta Updesh. The knowledge was given so that Humans can know about the essence of their existence and how they should lead their lives.

गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अनासक्त कर्म यानी ‘फल की इच्छा किए बिना कर्म’ करने की प्रेरणा दी।

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इसका प्रमाण उन्होंने अपने निजी जीवन में भी प्रस्तुत किया। मथुरा विजय के बाद भी उन्होंने वहां शासन नहीं किया।

Geeta-Updesh

 

कला से प्रेम करो : संगीत व कलाओं का हमारे जीवन में विशिष्ट स्थान है। भगवान ने मोरपंख व बांसुरी धारण करके कला, संस्कृति व पर्यावरण के प्रति अपने लगाव को दर्शाया।

इनके जरिए उन्होंने संदेश दिया कि जीवन को सुंदर बनाने में संगीत व कला का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

निर्बल का साथ दो : कमजोर व निर्बल का सहारा बनो। निर्धन बाल सखा सुदामा हो या षड्यंत्र का शिकार पांडव, श्रीकृष्ण ने सदा निर्बलों का साथ दिया और उन्हें मुसीबत से उबारा।

अन्याय का प्रतिकार करो : अन्याय का सदा विरोध होना चाहिए। श्रीकृष्ण की शांतिप्रियता कायर की नहीं बल्कि एक वीर की थी। उन्होंने अन्याय कभी स्वीकार नहीं किया। शांतिप्रिय होने के बावजूद शत्रु अगर गलत है तो उसके शमन में पीछे नहीं हटें।

मातृशक्ति के प्रति आदर भाव रखें : महिलाओं के प्रति सम्मान व उन्हें साथ लेकर चलने का भाव हो। भगवान कृष्ण की रासलीला दरअसल मातृशक्ति को अन्याय के प्रति जागृत करने का प्रयास था और इसमें राधा उनकी संदेशवाहक बनीं।

अपने अहंकार को छोड़ो : व्यक्तिगत जीवन में हमेशा सहज व सरल बने रहो।

जिस तरह शक्ति संपन्न होने पर भी श्रीकृष्ण को न तो युधिष्ठिर का दूत बनने में संकोच हुआ और न ही अर्जुन का सारथी बनने में। एक बार तो दुर्योधन के छप्पन व्यंजन को छोड़ कर विदुरानी (विदुर की पत्नी) के घर उन्होंने सादा भोजन करना पसंद किया।

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जीवन में उदारता रखें : उदारता व्यक्तित्व को संपूर्ण बनाती है।

श्रीकृष्ण ने जहां तक हो सका मित्रता, सहयोग सामंजस्य आदि के बल पर ही परिस्थितियों को सुधारने का प्रयास किया, लेकिन जहां जरूरत पड़ी वहां सुदर्शन चक्र उठाने में भी उन्होंने संकोच नहीं किया। वहीं अपने निर्धन सखा सुदामा का अंत तक साथ निभाया और उनके चरण तक पखारें।

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गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य

गीता को हिन्दु धर्म मे बहुत खास स्थान दिया गया है। गीता अपने अंदर भगवान कृष्ण के उपदेशो को समेटे हुए है। गीता को आम संस्कृत भाषा मे लिखा गया है, संस्कृत की आम जानकारी रखना वाला भी गीता को आसानी से पढ़ सकता है। गीता मे चार योगों के बारे विस्तार से बताया हुआ है, कर्म योग, भक्ति योग, राजा योग और जन योग।

गीता को वेदों और उपनिषदों का सार माना जाता, जो लोग वेदों को पूरा नही पढ़ सकते, सिर्फ गीता के पढ़ने से भी आप को ज्ञान प्राप्ति हो सकती है। गीता न सिर्फ जीवन का सही अर्थ समझाती है बल्कि परमात्मा के अनंत रुप से हमे रुबरु कराती है। इस संसारिक दुनिया मे दुख, क्रोध, अंहकार ईर्ष्या आदि से पिड़ित आत्माओं को, गीता सत्य और आध्यात्म का मार्ग दिखाकर मोक्ष की प्राप्ति करवाती है।

गीता मे लिखे उपदेश किसी एक मनुष्य विशेष या किसी खास धर्म के लिए नही है, इसके उपदेश तो पूरे जग के लिए है। जिसमे आध्यात्म और ईश्वर के बीच जो गहरा संबंध है उसके बारे मे विस्तार से लिखा गया है। गीता मे धीरज, संतोष, शांति, मोक्ष और सिद्धि को प्राप्त करने के बारे मे उपदेश दिया गया है।

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आज से हज़ारो साल पहले महाभारत के युद्ध मे जब अर्जुन अपने ही भाईयों के विरुद्ध लड़ने के विचार से कांपने लगते हैं, तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि यह संसार एक बहुत बड़ी युद्ध भूमि है, असली कुरुक्षेत्र तो तुम्हारे अंदर है। अज्ञानता या अविद्या धृतराष्ट्र है, और हर एक आत्मा अर्जुन है। और तुम्हारे अन्तरात्मा मे श्री कृष्ण का निवास है, जो इस रथ रुपी शरीर के सारथी है। ईंद्रियाँ इस रथ के घोड़ें हैं। अंहकार, लोभ, द्वेष ही मनुष्य के शत्रु हैं।

गीता हमे जीवन के शत्रुओ से लड़ना सीखाती है, और ईश्वर से एक गहरा नाता जोड़ने मे भी मदद करती है। गीता त्याग, प्रेम और कर्तव्य का संदेश देती है। गीता मे कर्म को बहुत महत्व दिया गया है। मोक्ष उसी मनुष्य को प्राप्त होता है जो अपने सारे सांसारिक कामों को करता हुआ ईश्वर की आराधना करता है। अहंकार, ईर्ष्या, लोभ आदि को त्याग कर मानवता को अपनाना ही गीता के उपदेशो का पालन करना है।

गीता सिर्फ एक पुस्तक नही है, यह तो जीवन मृत्यु के दुर्लभ सत्य को अपने मे समेटे हुए है। कृष्ण ने एक सच्चे मित्र और गुरु की तरह अर्जुन का न सिर्फ मार्गदर्शन किया बल्कि गीता का महान उपदेश भी दिया। उन्होने अर्जुन को बताया कि इस संसार मे हर मनुष्य के जन्म का कोई न कोई उद्देशय होता है। मृत्यु पर शोक करना व्यर्थ है, यह तो एक अटल सत्य है जिसे टाला नही जा सकता। जो जन्म लेगा उसकी मृत्यु भी निश्चित है। जिस प्रकार हम पुराने वस्त्रो को त्याग कर नए वस्त्रो को धारण करते है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर के नष्ट होने पर नए शरीर को धारण करती है। जिस मनुष्य ने गीता के सार को अपने जीवन मे अपना लिया उसे ईश्वर की कृपा पाने के लिए इधर उधर नही भटकना पड़ेगा।

श्री कृष्ण का मानव जीवन जीने का उपदेश

श्रीमद भगवद एकादश स्कंध अध्याय ७ श्लोक ६-१२

तुम अपने आत्मीय स्वजन और बन्धु-बांधवों का स्नेह सम्बन्ध छोड़ दो और अनन्य प्रेम से मुझमें अपना मन लगाकर सम दृष्टी से पृथ्वी पर स्वच्छंद विचरण करो|

इस जगत में जो कुछ मन से सोचा जाता है, वाणी से कहा जाता है, नेत्रों से देखा जाता है, और श्रवण आदि इन्द्रियों से अनुभव किया जाता है, वह सब नाशवान है, स्वप्न की तरह मन का विलास है| इसीलिए माया-मात्र है, मिथ्या है-ऐसा जान लो |

जिस पुरुष का मन अशांत है, असयंत है उसी को पागलों की तरह अनेकों वस्तुयें मालूम पड़ती हैं ; वास्तव में यह चित्त का भ्रम ही है | नानात्व का भ्रम हो जाने पर ही “यह गुण है” और “यह दोष है” इस प्रकार की कल्पना करी जाती है | जिसकी बुद्धि में गुण और दोष का भेद बैठ गया हो, दृणमूल हो गया है, उसी के लिए कर्म, अकर्म और विकर्म रूप का प्रतिपादन हुआ है |

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जो पुरुष गुण और दोष बुद्धि से अतीत हो जाता है, वह बालक के समान निषिद्ध कर्मों से निवृत्त होता है ; परन्तु दोष बुद्धि से नहीं | वह विहित कर्मों का अनुष्ठान भी करता है, परन्तु गुण बुद्धि से नहीं |

जिसने श्रुतियों के तात्पर्य का यथार्थ ज्ञान ही प्राप्त नहीं कर लिया, बल्कि उनका साक्षात्कार भी कर लिया है और इस प्रकार जो अटल निश्चय से संपन्न हो गया है, वह समस्त प्राणियों का हितैषी सुहृद होता है और उसकी साड़ी वृत्तियाँ सर्वथा शांत रहती हैं| वह समस्त प्रतीयमान विश्व को मेरा ही स्वरुप – आत्मस्वरूप देखता है; इसलिए उसे फिर कभी जन्म-मृत्यु के चक्र में नहीं पड़ना पड़ता |

|| जय श्री कृष्ण ||

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28 Responses to Geeta Updesh in Hindi – गीता उपदेश

  1. ajay says:

    Krisan ki 16000 Hazar patni thi kya krisan ne Apne 45 sal Sahi karte karte hi jujar diye krisan ne kya11200 fere liye the or vo itni ptniyo ko kya kiya itni patni yo ko khus kr paya hoga aagar vo bghvan tha to vo mra q

    in que. Ke ans h kya kisi ke paas to cell kre 8607208982

    • haribol says:

      Radhe Radhe Ajay ji,

      Soft Reply: Pehle aap Srimad Bhagwat Puran acche se kum se kum 3 baar pura padhe. Aapko sabhi baaton ka uttar mil jayega.

      Hard Reply: Ajay ji agar ghar may do chaar jodi joote chappal ho toh khud ke face pe 10 baar jor se maariye aur Bhagwan se kshama mangiye. Kyuki jaisi aapki soch hai jald hi kisi din acche se pit jaaoge kisi haribhakt kattar Hindu dwara.

      Jai Shree Krishn

  2. Sanjay prajapati says:

    Bina bhakti bhav k 84lac yonio me Jana hi hai isliye bhakti yoga apnao taki agla janm for manusy ka ho

  3. jai shri krishna main aaj se iska palan karunga kuch bhi ho main ab krodh or irshya etc nahi karunga

  4. AMAN SHUKLA says:

    Isse bhatke hue logo ko rasta milta h. Jo bhi iss path pe chale usse jine ka sahara mil jayega.
    Main ek hi chiz kahunga achha karam kro parmatma uska fal awasya dega.

  5. Roshan Barnwal says:

    Isse bhatke hue logo ko rasta milta h. Jo bhi iss path pe chale usse jine ka sahara mil jayega.
    Main ek hi chiz kahunga achha karam kro parmatma uska fal awasya dega.

  6. amit jha says:

    Bus itna hi khena chaunga nice kuch aacha feel Hua

  7. geeta padnese hame life me possitive rahane ki prerna milti hai

    • Gaurav says:

      Yes Geeta hmare jivan ka mhan yog he geeya ka gyan kabhi west nhi jata.

    • mohit says:

      Gita depicts us the reality of life. The follower of gita are the real follower of god.

  8. bhagwan modi says:

    REally great Geeta
    For art of living

  9. RAJESHJANI says:

    GEETA IS A NOT ONLY REALIGION BOOK BUT GEETA IS WHOL MEANING OF HUMAN LIFE & HUMAN LIFE SYSTEM

  10. Rajan singh says:

    Geeta is very usefull in life

  11. abhishek pandey says:

    jay sri krishna……….

  12. jagu says:

    sahi m yeh toh kalyug hi hai yaha koi satya ki jai nni bolta hai adhram ki jai bolte hain kya kar sakte hain batao aise kalyug m phir ..

  13. Shifali says:

    Hare krishna…geeta ka sar samjh aajaye to manav is bav sagar se paat utar jaye

  14. NITIN says:

    right geeta is all in one…….give all knowledge

  15. Maneesh Kumar Jilendra says:

    Jai shree Krishna…..

  16. Tashbir Singh says:

    Geeta mein likhi gai baton ka hamein anusran karna chahiye.

  17. santosh kumar saha says:

    Hare krishna
    Radhe Radhe

  18. riya says:

    jai shree krishnnnnnn

  19. Rohit Thakur says:

    jai shri ram
    gau seva karo aur dukhiyo ki seva karo bus aur bhagwan ka name sukh dukh dono samay jo. jai shri radhekrishna

  20. TITAN KUMAR DAS says:

    kebal gyan lene se nahi hotahe usi gita gyan ko apna nitidin ka jiban mein ya apna karmkhetra mein palna jaruri he. Tab jake ehi gita gyan phaldai hota he. JAY SHRI KRISHNA.

  21. gaurav.punj says:

    Geeta, Ramayan and Mahabharta are Dharmik granth books..vo holy books school ke bacho ko padhana chahiye.. vedic knowledge badhti ha tez dimag or vo books pure world ke schools mai padhana chahiye… Guru ke samne…or bache ache celibacy ke palan kar sake.. school mai geeta, ramayan and mahabhara books padhe jaaaye toh…acha hota ha…
    Modi ji visit at Ireland and white Irish peoples speak sanskrit verse and sang sanskrit theme song front of modi ji at Dublin WOW

  22. Aaj ke yug mein galat aadmi balshaali Kyun hain Aur sahi aadmi ko Koi Kyun nahi puchta.

    • haribol says:

      Radhe Radhe Nitin ji,

      Kyuki Yeh Kaliyug hai aur dharma sirf ek pair pe khada hai. Yeha bhola bane rehne se murkh banaya jaate hai isiliye samajhdar aur sajag rahne ki jarurat hai. Aanewale samay mey aur pratikul paristhithi hogi. Isliye dharm ke raaste pe chalte hue Shree Krishn ke sharan mey jana chahiye aur prayasrat usi ke liye rehna chahiye.

      Jai Shree Krishn

  23. Rajesh says:

    Rajesh sikarwar Dholpur
    Shrimadbhagbat geeta ka gyan jaruri

    • yogi says:

      Jai Shri Krishna jai gopala

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